मधुमेह (Diebetes) क्या है , इसका घरेलू नुस्खे से छुटकारा कैसे पाएं , साथ ही इसके लक्षण ओर उपाय जानिए.

मधुमेह (Diebetes) क्या है , इससे छुटकारा कैसे पाएं

मधुमेह (Diebetes) क्या है , इससे छुटकारा कैसे पाएं
प्रतिक्रियात्मक चित्र-Diebetes level
आज के समय में मधूमेह (Diebetes) एक ऐसी बीमारी हैं, जो बड़े बुजुर्गों में ही नहीं कम उम्र (age) के लोगों को भी अपने जाल में फ़साती नजर आ रही हैं, मतलब आज के समय में मधुमेह बीमारी के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैं।

मधुमेह मेटाबोलिक (Metabolic) बीमारियों का एक समूह है, जिसमें व्यक्ति के खून में ग्लूकोज (ब्लड शुगर) का लेवल नॉर्मल से अधिक हो जाता है। ऐसा तब होता है, जब शरीर में इंसुलिन ठीक से न बने या शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन के लिए ठीक से प्रतिक्रिया न दें। जिन मरीजों का ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है वे अक्सर पॉलीयूरिया (बार-बार पेशाब आना) से परेशान रहते हैं। उन्हें प्यास (पॉलीडिप्सिया) और भूख (पॉलिफेजिया) ज़्यादा लगती है।


मधुमेह (diebetes) के प्रकार

मुख्यतः diebetes 3 प्रकार की होती हैं।

टाइप 1

टाइप 2

टाइप 3

टाइप 1इस प्रकार की डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता। मधुमेह के तकरीबन 10 फीसदी मामले इसी प्रकार के होते हैं।
यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, इसमें बीटा कोशिकाएँ इंसुलिन नहीं बना पाती हैं। इस मधुमेह में मरीज़ को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि शरीर में इंसुलिन की मात्रा सही तरीक़े से बनी रहे। यह डायबिटीज़ बच्चों और युवाओं को होने की आशंका ज़्यादा होती है।

टाइप 2 इस प्रकार की डायबिटीज में शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता। दुनिया भर में मधुमेह के 90 फीसदी मामले इसी प्रकार के हैं। इस टाइप का diebetes आनुवांशिक माना गया हैं, इसमे अगर आपके घर पर कोई पहले से मधुमेह से पीड़ित हैं, तो आप भी इससे पीड़ित हो सकते है।

टाइप 3 इस प्रकार कि मधुमेह (diebetes) को जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता हैं, जो गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है। इस दौरान खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे गर्भवती महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा ज़्यादा रहता है।

इसके लिए हमे उचित व्यायाम, आहार और शरीर के वजन पर कंट्रोल बनाए रखकर मधुमेह को नियन्त्रित रखा जा सकता है। अगर मधुमेह पर ठीक से नियन्त्रण न रखा जाए तो मरीज में दिल, गुर्दे, आंखें, पैर एवं तंत्रिका सम्बंधी कई तरह की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।


मधुमेह के कारण (Diabetes Causes)

1. लाइफस्‍टाइल: मधुमेह (diebetes) होने का मुख्य कारण lifestyle ही होता हैं, क्योंकि इस गतिहीन जीवनशैली, अधिक मात्रा में जंक फूड, फिजी पेय पदार्थो का सेवन और खाने-पीने की ग़लत आदतें मधुमेह का कारण बन सकती हैं। घंटों तक लगातार बैठे रहने से भी मधुमेह की संभावना बढ़ती है।

2. सामान्य से अधिक वजन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता: अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से ज़्यादा सक्रिय न हो अथवा मोटापे का शिकार हो, उसका वजन सामान्य से अधिक हो तो भी मधुमेह की सम्भावना बढ़ जाती है। ज़्यादा वजन इंसुलिन के निर्माण में बाधा पैदा करता है। शरीर में वसा कि लोकेशन भी इसे प्रभावित करती है।

पेट पर अधिक वसा का जमाव होने से इंसुलिन उत्पादन में बाधा आती है, जिसका परिणाम टाइप 2 डायबिटीज, दिल एवं रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को अपने BMI (शरीर वजन सूचकांक) पर निगरानी बनाए रखते हुए अपने वजन पर नियन्त्रण रखना चाहिए।

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3. जीन एवं पारिवारिक इतिहास: कुछ विशेष जीन मधुमेह की सम्भावना बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है।


मधुमेह से कैसे बचा जा सकता है (Diabetes Prevention)

1. नियमित व्यायाम करें: गतिहीन जीवनशैली मधुमेह के मुख्य कारणों में से एक है। रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम मधुमेह से बचने के लिए आवश्यक है। साथ ही सुबह के समय में कम से कम 2 या 3 किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। साथ ही कुछ योगासन ओर एक्सरसाइज भी करे।

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2. संतुलित आहार: सही समय पर सही आहार जैसे फलों, सब्जियों और अनाज का सेवन बेहद फायदेमंद है। लम्बे समय तक खाली पेट न रहें। हमेशा उच्च विटामिन (vitamin) युक्त भोजन ही करने की कोशिश करे। साथ ही अपनी नियमित कैलोरी ग्रहण करनी चाहिए।

3. सही खान-पान–मधुमेह के मरीज़ों को अपने खान-पान का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए। इसलिए, डॉक्टर डायबिटीज़ के लिए एक विशेष आहार चार्ट बनाते हैं और उसी के अनुरुप खान-पान की सलाह देते हैं। खाने में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गाजर, टमाटर, संतरा, केला व अंगूर खा सकते हैं। इसके अलावा अंडा, मछली, चीज़ और दही का भी सेवन करने की सलाह दी जाती है।

 (इसे भी पढ़े-विटामिन प्राप्त करने के लिए भोजन में क्या खाएं)

3. वजन पर नियन्त्रण रखें: उचित आहार और नियमित व्यायाम द्वारा वजन पर नियंत्रण रखें। अपनी डाइट को रोजाना के लिए फिक्स रखे, ओर time table का भी विशेस ध्यान रखे। कम वजन और उचित आहार से डायबिटीज के लक्षणों को ठीक कर सकते हैं।

 (इसे भी पढ़े-कम वजन करने के टिप्स)

4. पर्याप्त नींद: रोजना सात-आठ घंटे की नींद महत्त्वपूर्ण है। नींद के दौरान हमारा शरीर विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर में टूट-फूट की मरम्मत करता है। देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने से मधुमेह और उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ती है।

5. तनाव से बचें: तनाव आज हर किसी के जीवन का ज़रूरी हिस्सा बन गया है। मनोरंजक एवं सामाजिक गतिविधियों द्वारा अपने आप को तनाव से दूर रखने की कोशिश करें। साथ ही तनाव के दौरान सिगरेट का सेवन करने से मधुमेह की सम्भावना और अधिक बढ़ जाती है

Note:-धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता हैं।


मधुमेह (Diebetes) क्या है , इसमें धूम्रपान वर्जित हैं

मधुमेह (Diebetes) के लक्षण

हर किसी को मधुमेह के कुछ लक्षणों का पता होना ज़रूरी है। इसके कई ऐसे साधारण (normal) से दिखने वाले लक्षण होते हैं, जिन पर अगर आप समय रहते ध्यान देते हैं, तो इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। नीचे हम कुछ ऐसे ही शुगर के लक्षण आपको बता रहे हैं।
जिनको आप आसानी से पहचान सकते हो।

  • बार-बार पेशाब लगना।
  • लगातार शरीर में दर्द की शिकायत होना।
  • बार-बार त्वचा और प्राइवेट पार्ट्स में संक्रमण होना या कैविटी होना।
  • घाव (कटा हुआ हिस्सा) का जल्दी न भरना।
  • गला सूखना या बार-बार प्यास लगना।
  • आंखों की रोशनी कमज़ोर होना।
  • वज़न का अचानक से ज़्यादा बढ़ना या कम होना।
  • लगातार थकान या कमज़ोरी महसूस होना।
  • ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगना।
  • व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना।
  • डॉक्टर इंसुलिन पंप की भी सलाह देते हैं।

मधुमेह (डायबिटीज, शुगर) के घरेलू उपचार– (Diabetes Home Remedies)

अब हम यहाँ पर मधुमेह (diebetes) के घरेलू उपचारों के बारे में बताएंगे, जो हमे घर पर ही आसानी से उपलब्ध हो, साथ ही उनका सेवन करके मधुमेह (diebetes) को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। जो इसप्रकार हैं।

1. करेले का जूस


मधुमेह (Diebetes) क्या है , करेला का उपयोग
करेला 

करेले में फाइबर होता है, जो एंटीडायबिटिक यौगिक है। इसमें ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को कम करने के गुण होते हैं। वैसे करेले की सब्जी खाने से भी काफी हद तक फायदा मिलता हैं।

सामग्री

  • एक करेला
  • चुटकीभर नमक
  • चुटकीभर कालीमिर्च
  • एक या दो चम्मच नींबू का रस

बनाने की विधि

  • करेले को धोकर उसका जूस निकाल लें।
  • अब इसमें स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च और नींबू का रस मिला लें।
  • अब इस मिश्रण को पिएँ।

कब करें सेवन?

आप हर रोज़ सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं।

2. एलोवेरा (Alovera)

एलोवेरा में लिपिड और ब्लड शुगर को कम करने वाले गुण होते हैं। इसके लगातार सेवन से आपका ब्लड ग्लूकोज़ लेवल नियंत्रित रहता है।

एलोवेरा का ज्यूस आसानी से market में मिल जाता हैं। अगर नहीं मिलता है तो आप ज्यूस घर पर भी बना सकते हो।

सामग्री

एलोवेरा का रस

कब करे सेवन?

हर रोज़ खाना खाने से 1 घंटे पहले बिना चीनी के एलोवेरा जूस का सेवन करें। इससे आपको Diebetes को कम करने का बहुत ही शीघ्र लाभ मिलेगा।

3. आंवला


मधुमेह (Diebetes) क्या है , इसमें आंवला ज्यूस का उपयोग
आंवला ज्यूस

आंवला में मौजूद क्रोमियम (chromium) ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मददगार होता है। यह इंसुलिन के प्रवाह को भी बढ़ाता है। इस वजह से, यह मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए काफ़ी फायदेमंद होता है।

सामग्री

  • आंवले का रस
  • हल्दी
  • शहद

बनाने की विधि

आंवले के रस में चुटकीभर हल्दी और शहद मिलाकर पिएँ। ऐसा करने से शुगर नियंत्रण में रहेगी।

इसका प्रयोग जिसको शुगर (Diebetes) ज़्यादा है, वह रोजाना करे और जिसका शुगर लेवल कम है वह सप्ताह में 3 बार करे।

4. दालचीनी

दालचीनी एक सुगंधित मसाला है, जिसका व्यापक रूप से विभिन्न व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है। यह ऑक्सीडेटिव तनाव, जिससे मधुमेह होने की आशंका होती है, उसे कम करने में मदद करता है।

सामग्री

  • आधा चम्मच दालचीनी पाउडर
  • एक गिलास गर्म पानी


बनाने की विधि

गर्म पानी में दालचीनी पाउडर मिलाकर पिएँ।

कब करें सेवन?

इस मिश्रण को रोज़ सुबह पिएँ।

5. मेथी


मधुमेह (Diebetes) क्या है , इसमें मेथी के उपयोग
मेथी दाना

मेथी का उपयोग मसाले के तौर पर होता है। इसके अलावा एक स्टडी के अनुसार, मेथी में ब्लड ग्लूकोज कम करने के गुण होते हैं, जो टाइप 2 मधुमेह के इलाज में काफ़ी मददगार साबित हो सकता है।

सामग्री

  • दो चम्मच मेथी दाना
  • दो कप पानी

बनाने की विधि

  • दो चम्मच मेथी दाने में दो कप पानी मिलाएँ।
  • अब इसे ढककर रात भर छोड़ दें।
  • अगले दिन पानी को छानकर खाली पेट पिएँ।

कब करें सेवन?

इसे हर सुबह पिएँ, जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल कम होगा।

6. जामुन

इसमें मौजूद उच्च पोटैशियम मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

सामग्री

  • जामुन
  • शहद

कैसे खाएँ?

आप एक चम्मच शहद के साथ जामुन का सेवन करें, ऐसा करने से आपकी शुगर नियंत्रण में रहेगी। सिर्फ़ जामुन ही नहीं, बल्कि इसके पत्तों में भी डायबिटीज़ नियंत्रण करने के गुण मौजूद हैं। आप चाहे तो जामुन के बीज को पीसकर पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।

कब करें सेवन

आप हफ़्ते में एक या दो बार इसका सेवन ज़रूर करें।

7. लहसुन

जब लहसुन को पीसा या कुचला जाता है, तो इसमें से एलिसिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट निकलता है। यह तत्व एंटीडायबिटिक (Antibiotic) होता है, जो मधुमेह को प्रभावी ढंग से रोकने में मदद करता है।

सामग्री

लहसुन के कुछ टुकड़े

कैसे इस्तेमाल करें?

आप रोज़ सुबह लहसुन की एक या दो कली खा सकते हैं।

अगर आपको कच्चा लहसुन खाना पसंद नहीं, तो आप अपनी पसंदीदा सब्ज़ी बनाने के समय उसमें थोड़ा लहसुन डाल सकते हैं।

8. नीम


मधुमेह (Diebetes) क्या है , इसमें नीम का प्रयोग
प्रतिक्रियात्मक चित्र- नीम की पत्ती

भारत में नीम के पत्तों, छाल और फलों को कई सालों से आयुर्वेदिक दवाइयाँ बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसार नीम में एंटीडाइबिटिक, एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके अलावा, कुछ स्टडीज के अनुसार नीम में खून में ग्लूकोज कम करने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा यह मधुमेह को रोकने में भी मददगार साबित हो सकता है। यहाँ तक कि नीम, मधुमेह के दौरान होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को भी रोक सकता है।

सामग्री

  • नीम के पत्ते
  • नीम का पेस्ट
  • नीम का कैप्सूल

कैसे खाएँ?

आप चाहें तो नीम के पत्तों को अच्छे से धोकर सुबह के समय खा सकते हैं।
एक चम्मच नीम के पेस्ट को पानी में मिलाकर सुबह-सुबह पी भी सकते हैं।
इसके अलावा, अगर आपको कच्चा नीम या नीम का पेस्ट पसंद नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नीम का कैप्सूल भी ले सकते है।

(इसे भी पढ़े-गर्मी में लू से कैसे बचें)

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