पुरानी कब्ज से छुटकारा पाने के लिये अपनाये ये आसान से घरेलू उपाय......

कब्ज-लक्षण, कारण, इलाज, दवा और उपचार।

कब्ज-लक्षण, कारण, इलाज, दवा और उपचार।
प्रतिक्रियात्मक चित्र - कब्ज से परेशान वयक्ति

अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्ज की समस्या होना आम बात है। भोजन के बाद बैठे रहने और रात के खाने के बाद सीधे सो जाने जैसी आदतें कब्ज के लिए जिम्मेदार होती हैं।

कब्ज पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है।

पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कब्जियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। रोजाना कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता कि निशानी है।


कब्ज के कारण क्या हैं? (Constipation Causes)


किसी भी व्यक्ति में कब्ज होने के पीछे कई संभावित कारण होते हैं जैसे की-एनल फिशर, बाउल ऑब्सट्रक्शन, कोलन या रेक्टल के कैंसर के कारण कोलन या मलाशय में रुकावट, कोलन का संकुचन की स्थितियों की तरह मलाशय उभार, कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियाँ जो कोलन और मलाशय के चारों ओर तंत्रिका में समस्याएँ पैदा करती हैं, निष्क्रियता, उचित मात्रा में नहीं लेना।

आहार में फाइबर, तनाव, जुलाब की व्यापकता, कैल्शियम और एल्युमिनियम से युक्त एंटासिड्स का सेवन, कमजोर श्रोणि की मांसपेशियों में शामिल समस्या, डायबिटीज, गर्भावस्था जैसे रोग की स्थिति, शरीर के हार्मोन को प्रभावित करने वाले हाइपरपेरायरायडिज्म, अंगों और ऊतकों को प्रभावित करने वाले अन्य प्रणालीगत रोग या पूरे शरीर ऐसे कारण हैं जिन्हें पुरानी कब्ज के विकास के पीछे माना जा सकता है। 

उम्र के लिहाज से बड़ा होना, डिहाइड्रेशन, महिला लिंग, रोजाना पर्याप्त पानी न पीना, टॉयलेट जाने की अनदेखी करना, दूध या अन्य डेयरी उत्पादों का सेवन अधिक करना भी कुछ कारक हैं जो इसकी संभावना को बढ़ाते हैं।

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कब्ज के लिए रोकथाम क्या हैं? (Prevention of Constipation)


कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को भोजन में ये शामिल करना चाहिए:

  • बीन्स, सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज जैसे हाई फाइबर फ़ूड को डेली डाइट में शामिल किया जाना चाहिए.
  • अपने दिन की शुरुआत गर्म तरल पदार्थ जैसे गर्म पानी से करें।
  • पानी और अन्य प्रकार के तरल पदार्थों का सेवन बढ़ जाना।
  • उन खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें जिनमें कम मात्रा में फाइबर होता है जैसे कि मांस, दूध आदि।
  • शारीरिक गतिविधि में सुधार करें और नियमित व्यायाम करें क्योंकि इससे आंतों की मांसपेशियों की ताकत बढ़ सकती है।
  • तनाव को कम करने वाले कारक को कम करें
  • मल या शौच की उपेक्षा को रोकें।
  • हर भोजन के बाद, मल त्याग के लिए एक शेड्यूल बनाएँ
  • कब्ज में आसानी के लिए, जुलाब एक या दो दिन के लिए लिया जा सकता है।

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कब्ज का निदान कैसे करें? (Diagnosis of Constipation)


बीमारी का निदान मुख्य रूप से एक शारीरिक परीक्षा करके किया जा सकता है और मेडिकल हिस्ट्री बनाने वाले डॉक्टर की समझ से कब्ज के प्रकार और कारण की पहचान हो सकती है। हेल्थकेयर प्रोफेशनल डेली डाइट डायरी को बनाए रखने के बारे में रोगी को देखेंगे और सूचित करेंगे जिसके माध्यम से वे हाई-फाइबर फ़ूड के सेवन के बारे में सलाह दे सकते हैं।

थायराइड हार्मोन और कैल्शियम, पेट एक्स-रे, लिक्विड बेरियम अध्ययन के टेस्ट के माध्यम से आंत्र और मलाशय की शारीरिक रचना को समझने के लिए, पेट की गतिशीलता और एनोरेक्टल स्टडीज, डेफ़ेकोग्राफी और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग डेफ़ेकोग्राफी, मेडिकल प्रोफेशनल कब्ज की गंभीरता का निदान कर सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए जो उपचार का जवाब नहीं दे रहे हैं।


कब्ज से छुटकारा कैसे पाएँ-(How to get rid of constipation)


  • सुबह उठकर अधिक गर्म पानी पीना
  • डाइट में सब्जियों और फलों को शामिल करें
  • एक दिन में चार गिलास पानी पीएँ, जब तक कि आपके डॉक्टर ने किसी अन्य कारण से तरल पदार्थ का सेवन सीमित न किया हो
  • खाने में रेशेदार अनाज का सेवन करे
  • यदि आपको आवश्यकता महसूस हो तो मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड जैसे हल्के मल सॉफ़्नर या जुलाब लें। अपने डॉक्टर से परामर्श के बिना दो सप्ताह से अधिक समय तक रेचक का उपयोग न करें। यदि जुलाब अधिक हो गए हैं, तो लक्षण खराब हो सकते हैं।
  • फाइबर से भरपूर पौष्टिक आहार लें। फाइबर के अच्छे स्रोत सब्जियाँ, फलियाँ, फल और चोकर जैसे अनाज के ब्रेड हैं।
  • फाइबर युक्त भरपूर भोजन करें। फाइबर के अच्छे स्रोत हैं फल, सब्जियाँ, फलियाँ आदि।
  • एक दिन में 1 1 / 2 से 2 चौथाई पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएँ (जब तक कि आपके डॉक्टर ने आपको तरल-प्रतिबंधित आहार न दिया हो) । फाइबर और पानी आपको नियमित रखने के लिए एक साथ काम करते हैं।
  • कैफीन से बचें। क्योंकि इससे डिहाइड्रेशन हो सकता है।
  • दूध का सेवन बंद करे। कुछ लोगों को इससे बचने की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि डेयरी उत्पादों का सेवन करने से कब्ज़ हो सकती हैं।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। सप्ताह के अधिकांश दिनों में दिन में कम से कम 30 मिनट सक्रिय रहें।
  • आग्रह करने पर बाथरूम में जाएँ।


पेट मे कब्ज को ठीक करने के लिए ये 10 घरेलू उपाय भी बहुत अच्छे साबित हुए हैं।


1 सुबह उठने के बाद पानी में नींबू का रस और काला नमक मिलाकर पिएँ। इससे पेट अच्छी तरह साफ होगा और कब्ज की समस्या नहीं होगी।

2 कब्ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर पिएँ। इसके नियमित सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है।

3 सुबह उठकर प्रतिदिन खाली पेट, 4 से 5 काजू, उतने ही मुनक्का के साथ मिलाकर खाने से भी, कब्ज की शिकायत समाप्त हो जाती है। इसके अलावा रात को सोने से पहले 6 से 7 मुनक्का खाने से भी कब्ज ठीक हो जाता है।

4 प्रतिदिन रात में हरड़ के चूर्ण या त्रिफला को गुनगुने पानी के साथ पिएँ। इससे कब्ज दूर हेगा, साथ ही पेट में गैस बनने की समस्या से भी निजात मिलेगी।

5 कब्ज के लिए आप सोते समय अरंडी के तेल को हल्के गर्म दूध में मिलाकर पी सकते हैं। इससे पेट साफ होता है और कब्ज की समस्या नहीं होती।

6 ईसबगोल की भूसी कब्ज के लिए रामबाण इलाज है। आप इसका प्रयोग दूध या पानी के साथ, रात को सोते वक्त कर सकते हैं। इससे कब्ज की समस्या बिल्कुल समाप्त हो जाएगी।

7 फलों में अमरूद और पपीता, कब्ज के लिये बेहद फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन किसी भी समय किया जा सकता है। इन्हें खाने से पेट की समस्याएँ तो समाप्त होती ही हैं, त्वचा भी खूबसूरत बनती है।

8 किशमिश को कुछ देर तक पानी में गलाने के बाद, इसका सेवन करने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है। इसके अलावा अंजीर को भी रातभर पानी में गलाने के बाद उसका सेवन करने से कब्ज की समस्या खत्म होती है।

9 पालक भी कब्ज के मरीजों के लिए एक अच्छा विकल्प है। प्रतिदिन पालक के रस को दिनचर्या में शामिल कर, आप कब्ज से आजाादी पा सकते हैं, साथ ही इसकी सब्जी भी सेहत के लिए अच्छी होती है। लेकिन अगर आप पथरी के मरीज हैं, तो इसका इस्तेमाल न करें।

10 कब्ज से बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम और योगा करना बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा हमेशा गरिष्ठ भोजन करने से बचना चाहिए।

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कब्ज होने पर क्या-क्या खाना चाहिए?(What to eat when constipation)


कब्ज में खाएँ पॉपकार्न- (Eat popcorn in constipation) 


पॉपकॉर्न में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर की मात्रा बहुत अधिक। इसलिए पॉपकॉर्न खाएँ, लेकिन बिना नमक और बिना बटर वाले पॉपकॉर्न खाएँ। अच्छी गुणवत्ता वाले और माइक्रोवेव में बने पॉपकॉर्न को ही खाना चाहिए। पॉपकॉर्न साबुत अनाज है और साबुत अनाज में सबसे अधिक मात्रा में फाइबर मौजूद होते हैं। फाइबर कब्ज के उपचार में रामबाण की तरह काम करता है।

कब्ज में खाना चाहिए बीन्स- (Eat beans in constipation) 

बीन्स या फलियाँ और मसूर की दाल में सब्जियों की तुलना में दो गुना फाइबर होते हैं। आधा कप फली में लगभग 10 ग्राम फाइबर होते हैं। फाइबर कब्ज को कम करने में बहुत ज़्यादा लाभदायक है। इसलिए जितना हो सके अधिक से अधकि फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाना चाहिए। बीन्स को आप निम्न खाद्य पदार्थों में मिलाकर खा सकते हैं जैसे सलाद, सूप, पुलाव और पास्ता में।

कब्ज में खाएँ ड्राय फ्रूट- (Eat dry fruits in constipation) 
कब्ज में सूखे मेवे का उपयोग
प्रतिक्रियात्मक चित्र -सूखे मेवे
ड्राय फ्रूट जैसे खजूर, अंजीर, खुबानी और किशमिश फाइबर के बेहतर स्रोत हैं। फाइबर कब्ज को कम करने में सहायक है। इसके अलावा आलूबुखारा में फाइबर के साथ-साथ सोर्बिटोल (सोर्बिटोल एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है) भी पाया जाता है, जो कब्ज से राहत दिलाने में बहुत ज़्यादा फायदेमंद है। 

फाइबर आपके आंत में पानी की मात्रा बनाए रखता है और मल त्याग में भी मदद करता है। इसके साथ ही साथ यह कब्ज को भी ठीक करता है। ड्राय फ्रूट में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी और शुगर होते हैं, इसलिए इस बात का ध्यान रखते हुए इन्हें खाएँ।

(इसे भी पढ़े- गर्मी में लू से बचने के लिए क्या करे)

कब्ज में खाना चाहिए होल ब्रेड ग्रेन- (Eat whole grain bread in constipation) 

यदि आप कब्ज की समस्या से बहुत ज़्यादा परेशान हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सुबह नाश्ते में सामान्य ब्रेड की जगह होल ग्रेन ब्रेड खाएँ। होल ग्रेन ब्रेड में कम वसा होती है और फाइबर व कार्बोहाइड्रेट्स अधिक होते हैं। फाइबर कब्ज के इलाज में बहुत ज़्यादा लाभदायक है। हालांकि, होल ब्रेड ग्रेन खरीदते समय सावधानी रखें और अच्छी तरह जांच-परख कर ही इसे खरीदें।

कब्ज में खाएँ फाइबर युक्त अनाज- (Eat fiber containing cereals in constipation) 

कब्ज से राहत पाने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का चुनाव करें। इसके साथ ही साथ ऐसे अनाजों को खाएँ, जिसमें 1 बड़े चम्मच में कम से कम 6 से 7 ग्राम फाइबर मौजूद हो। यदि आपके पसंदीदा अनाज में फाइबर की मात्रा अधिक न हो, तो उसमें 1 से 2 चम्मच गेहूँ के चोकर, चिया के बीज और अलसी के बीज को मिलाकर खाएँ।

कब्ज को कम करने के लिए खाएँ सूखे मेवे- (Eat nuts to reduce constipation) 


सूखे मेवे में भी बहुत अधिक मात्रा में फाइबर मौजूद होते हैं। बादाम और अखरोट फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। 30 ग्राम बादाम में लगभग 3 से 4 ग्राम फाइबर मौजूद होते हैं। इसके अलावा 1 छोटे चम्मच पिस्ता में लगभग 3 ग्राम फाइबर मौजूद होते हैं। 

लेकिन, ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कितने ग्राम फाइबर एक दिन में खाना चाहते हैं। इसके साथ ही साथ आप इस बात का भी ध्यान रखें कि सूखे मेवे में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी मौजूद होते हैं, इसलिए इस बात का ध्यान रखते हुए इसे खाना चाहिए।


कब्ज होने क्या नहीं खाना चाहिए?(What should not be eaten when having constipation)



कब्ज में न खाएँ डेरी प्रोडक्ट- (Do not eat dairy products if you are constipated) 

पनीर, आइसक्रीम और अन्य डेरी उत्पाद कब्ज में बहुत ज़्यादा नुकसानदायक है। इसलिए इन खाद्य पदार्थों को कब्ज में नहीं खाना चाहिेए। डेरी उत्पाद दूध से बने होते हैं और दूध कब्ज की समस्या को बढ़ाता है। इसके अलावा जब बच्चों में कब्ज की समस्या हो तो दूध नहीं देना चाहिए, यह कब्ज को और बढ़ाता है। दूध की जगह फल खाएँ, इससे कब्ज को ठीक करने में सहायता मिलेग

कब्ज में न खाएँ लाल मांस- (Do not eat red meat in constipetion) 

लाल मांस अपने आप में कब्ज की समस्या को बढ़ावा नहीं देता है। यह नुकसानदायक तब होता है, जब आप इसे रोजाना खाते हैं और यह आपके आहार में फाइबर की जगह लेने लगता है। इसके अलावा जब आप बहुत अधिक मात्रा में लाल मांस खाते हैं, तो हमेशा आपका पेट भरा हुआ महसूस होता है। अपने आहार में अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे उबला आलू और सलाद को अपने डाइट में शामिल करें। इससे आपको कब्ज की समस्या से राहत मिलेगी।

कब्ज में नहीं खाना चाहिए चिप्स- (Do not eat chips in constipation) 


स्नैक्स जैसे आलू के चिप्स और अन्य प्रकार के चिप्स कब्ज की समस्या में बहुत ज़्यादा नुकसानदायक होते हैं। इसलिए इन खाद्य पदार्थों को नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा अधिक फैट वाले खाद्य पदार्थ, जैसे आलू चिप्स और अन्य मल त्याग में बाधा उत्पन्न करते हैं। इसलिए अधिक फैट वाले स्नैक्स की जगह अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को खाना चाहिए।

कब्ज में नहीं खाएँ बेकरी वाले प्रोडक्ट- (Do not eat bakery products in constipation) 

बेकरी वाले उत्पाद जैसे कुकीज, प्रेस्ट्री और केक में रिफाइड कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो कब्ज में नुकसानदायक होते हैं। इसके अलावा इन खाद्य पदार्थों में फाइबर बहुत कम मात्रा में होती है। इसलिए कब्ज की समस्या में अधिक फैट वाले खाद्य पदार्थों को नहीं खाना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों की जगह आप फल खाएँ, फल कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।

कब्ज में नहीं खाना चाहिए केला- (Avoid bananas in constipation) 
केला
प्रतिक्रियात्मक चित्र-केला
यह बहुत दिलचस्प है कि केला कब्ज से राहत दिलाता है और कब्ज की वजह भी बनता है। ये दोनों बात इस बात पर निर्भर करता है केला कच्चा है या पका हुआ है। कच्चा केला कब्ज की समस्या पैदा करता है, लेकिन पका हुआ केला कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है क्योंकि इसमें घुलनशील फाइबर मौजूद होते हैं। यह घुलनशील फाइबर आंत से अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है और कब्ज को कम करने में भी सहायक है। इसलिए कब्ज को ठीक करने के लिए अच्छे गुणवत्ता वाले और पके हुए केले खाना चाहिए।

कब्ज में हानिकारक हैं तले हुए खाद्य पदार्थ- (Fried food is harmful in constipation) 

कब्ज रोगियों को अधिक तले हुए खाद्य पदार्थ जैसे फ्रेंच फ्राइज और चिप्स आदि नहीं खाना चाहिए। यह खाद्य पदार्थ पाचन शक्ति को कमजोर बनाते हैं। इसके साथ ही साथ बहुत अधिक मछली खाने से भी आपके पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कब्ज की समस्या बढ़ती है। अधिक तले हुए खाद्य पदार्थ जैस आलू चिप्स और अन्य खादय् पदार्थ पचने में बहुत ज़्यादा समय लेते हैं। इसलिए भोजन को पकाने के लिए स्टिमिंग या ब्रॉइलिंग विधि का इस्तेमाल करें।

(इसे भी पढ़े- वजन और पेट कम करने के कुछ आदर्श योगासन)


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